माघ शुक्ल की द्वितीया तिथि पर सोमवार को आसमान में चंद्रमा, शुक्र व शनि ग्रह की युति की खगोलीय घटना हुई।

आसमान में बादल छाए रहने से शनि ग्रह दिखाई नहीं दिए। लेकिन चंद्र व शुक्र की युति को लोगों ने अपनी आंखों से निहारा। दोनों ग्रह चमकते हुए स्पष्ट दृश्य हो रहे थे।

भारतीय ज्योतिष के अनुसार सोमवार को चंद्रमा, शुक्र व शनि ग्रह एक ही राशि कुंभ में मौजूद थे। ऐसे में खगोलीय घटना के रूप में तीनों ग्रहों की युति बनी।

शाम को सूर्यास्त के बाद चंद्रमा के ठीक नीचे लट्टू के समान चमकता शुक्र ग्रह दिखाई दिया। आसमान में बादल छाए रहने के कारण शनि ग्रह दिखाई नहीं दिया। शनिग्रह का प्रकाश थोड़ा मंद रहता है, इसलिए बादलों के कारण शनि की दृश्यता कम रही और वह दिखाई नहीं दिए।

देशभर में खगोलविदों ने इस घटना को देखा, इसके लिए दूरबीन की भी जरूरत नहीं पड़ी। इस तरह की खगोलीय घटना की सूचना सामने आने के बाद आमजन ने भी आसमान टकटकी लगाकर तीनों ग्रहों को एक साथ देखा।

सोमवार शाम 6 बजकर 8 मिनट पर सूर्यास्त के बाद पश्चिम दिशा में हंसिए के आकार का चन्द्रमा दिखाई दिया। चन्द्रमा के ठीक नीचे थोड़ा दक्षिण की ओर लट्टू के समान चमकता हुआ शुक्र ग्रह दिखाई दिया। शुक्र ग्रह के ठीक नीचे एवं कम चमकदार शनि ग्रह दिखा। चन्द्रमा सायं 7 बजकर 54 मिनट पर अस्त हुआ। यानि यह सुंदर नजारा लगभग 1 घण्टे 30 मिनट की तक देखा गया

इस घटना को अपने घर से ही बिना किसी साधन के आंखों से भी अच्छी प्रकार से देखा गया। युति देखने के लिए टेलिस्कोप आदि किसी साधन की आवश्यकता नहीं होती है  क्योंकि पास-पास दिखने की स्थिति में भी खगोलीय पिण्ड टेलिस्कोप के दृश्य क्षेत्र से दूरी पर रहते हैं। घर पर ही खुले स्थान से इस खगोलीय घटना को देखा गया यह संजोग 30 वर्ष बाद आया।

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