सूर्य ग्रहण आज, अपनी राशि पर देखें प्रभाव, भारत के इन शहरों में दिखेगा साफ, सूतक काल देखें

भारतीय ज्योतिष के अनुसार सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण को शुभ नहीं माना गया है। ग्रहण के दौरान खाना-पीना और शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है। इस साल 2022 का आखिरी सूर्य ग्रहण आज 25 अक्टूबर को जय। यह ग्रहण दीपावली के अगले दिन पड़ रहा है।

आज 25 अक्टूबर मंगलवार को आंशिक सूर्य ग्रहण होगा। यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा। इसलिए सूतक काल माना जाएगा।

आपको बता दें कि कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर यह सूर्यग्रहण 25 अक्टूबर 2022 को तुला राशि में लगने जा रहा है।

आज लगने वाला यह सूर्य ग्रहण इस साल भारत में दिखने वाला एक मात्र सूर्य ग्रहण होगा। वहीं भारतीय ज्योतिषीय की दृष्टि से इस सूर्यग्रहण को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्योंकि ग्रहण के दौरान सूर्य के साथ तीन ग्रह चंद्रमा, शुक्र और केतु भी तुला राशि में होंगे।

साथ ही तुला राशि पर राहु और शनि की दृष्टि भी होगी। माना जा रहा है कि तुला राशि जिसमें सूर्य ग्रहण लग रहा है, उस पर और अन्य राशियों पर सूर्य ग्रहण का सबसे ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव हो सकता है।

आपको बता दें कि यह सूर्यग्रहण लगभग पूरे भारत में दिखाई देने वाला है। सूर्यग्रहण के दिन करीब 4 ग्रह एक साथ रहने वाले हैं। जिसका प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा लेकिन, इन राशियों के जातकों को थोड़ा अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होगी। बता दें कि इस समय चंद्रमा, सूर्य, शुक्र और केतु ये सभी ग्रह एक साथ तुला राशि में रहेंगे।

सूर्य ग्रहण का राशियों पर प्रभार देखें-

मेष राशि पर सूर्यग्रहण का प्रभाव-

इस सूर्यग्रहण के दौरान मेष राशि के लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। आपके पारिवारिक जीवन में उतार चढ़ाव आ सकता है। जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है। या फिर किसी कारण आपको अपने जीवनसाथी के दूर होना पड़ सकता है। दोनों के बीच सामंजस्य की भी कमी हो सकती है। आर्थिक निवेश को लेकर भी दोनों के बीच कुछ तनाव पैदा हो सकता है। यदि आप बड़े आर्थिक निवेश का मन बना रहे हैं तो फिलहाल कुछ समय के लिए उसे टाल देना ही सही होगा।

मिथुन राशि पर सूर्यग्रहण का प्रभाव का प्रभाव-

यह सूर्य ग्रहण मिथुन राशि के जातकों के लिए मुश्किलों भरा हो सकता है। आपके फिजूल खर्च में वृद्धि होगी। काम में रुकावटें होगी। वैवाहिक जीवन भी अशांत हो सकता है। व्यापार में हानि होने की भी संभावना है।

तुला राशि पर सूर्यग्रहण का प्रभाव-

यह सूर्यग्रहण तुला राशि में ही होने जा रहा है। इसलिए सबसे अधिक प्रभाव तुला राशि पर ही दिखाई देगा। इसलिए आपको बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि, संभावना है कि आप दुर्घटना आदि का शिकार हो सकते हैं। यदि आप किसी जलक्षेत्र के आसपास हैं तो आपको थोड़ा संभलकर रहना होगा। साथ ही वाहन का प्रयोग संभलकर करें, आपको चोट आदि लगने का भय बना रह सकता है। इन दिनों किसी न किसी बात को लेकर चिंता बनी रहेगी, खुद पर नकारात्मकता को हावी न होने दें। आपकी स्थिति में धीरे धीरे सुधार आएगा।

धनु राशि पर सूर्यग्रहण का प्रभाव-

सूर्य ग्रहण के दौरान, धनु राशि वालों की सेहत ख़राब हो सकती है, इस लिए आपको इसका विशेष ध्यान रखना होगा। आपको आर्थिक स्थिति में कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है।

मकर राशि पर सूर्यग्रहण का प्रभाव-

सूर्यग्रहण के कारण मकर राशि के लोगों को कुछ शारीरिक कष्ट होने की संभावना है। इसलिए सूर्यग्रहण से एक महीने के दौरान सेहत का मामला में आपको काफी सचेत रहना होगा। कोई शारीरिक कष्ट अचानक उभर सकता है। खान-पान संबंधी लापरवाही से बचें। इस राशि में शनि की भी चाल बदली है और सूर्य ग्रहण आपकी राशि से दसवें घर में होने जा रहा है तो आपको करियर और कारोबार में भी संभलकर चलना होगा। अधिकारियों से विवादों में उलझने से बचें। अपने इगो पर कंट्रोल करें और मान-सम्मान का ध्यान रखते हुए ही कोई भी काम करने की ज्योतिषीय सलाह है।

अमावस्या का समय-

अमावस्या तिथि 24 अक्टूबर को शाम 5.27 बजे शुरू हो रही है,
जो 25 अक्टूबर दोपहर 4:18 बजे तक चलती रहेगी।

गोवर्धन पूजा नहीं होगी, दीपावली के अगले दिन-

आज दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा का त्यौहार मनाया जाता है। लेकिन इस बार सूर्य ग्रहण के कारण गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, भाईदूज एक साथ 26 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

भारत में सूर्य ग्रहण-

यह सूर्य ग्रहण ग्रस्तास्त खंडग्रास सूर्य ग्रहण है,
भारतीय समय के अनुसार

25 अक्तूबर को ग्रहण का दोपहर 2.29 पर प्रारंभ होगा।

ग्रहण का मध्य- 4.30 सायं पर होगा।

ग्रहण की समाप्ति- 6.32 सायं बजे होगी।

ग्रहण की समाप्ति अरब सागर में खत्म होगी।

यह ग्रहण भारत देश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में बेहतर ढंग से दिखेगा। वहीं, देश के पूर्वी हिस्सों में यह ग्रहण नहीं दिख पाएगा, क्योंकि उन जगहों पर सूर्यास्त हो चुका होगा। इसके अलावा यूरोप, उत्तरी अफ्रीका, मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में भी यह आकाशीय घटना दिखाई देगी।

देहरादून, श्रीनगर, जम्मू और जलंधर में अच्छे से दिखेगा सूर्य ग्रहण-

यह सूर्य ग्रहण शाम 4.30 पर अपने चरम पर रहेगा। इस समय भारत में दिखना शुरू हो जाएगा। भारत में लेह, लद्दाख, जम्मू, श्रीनगर, उत्तराखण्ड, पंजाब, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में यह सूर्य ग्रहण दिखेगा।

इनमें श्रीनगर, जम्मू, जलंधर, अमृतसर, चंडीगढ़, देहरादून, हरिद्वार और शिमला में यह सूर्य ग्रहण ज्यादा साफ दिखाई देगा।

वहीं तमिलनाडु, कर्नाटक, मुंबई, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, बंगाल और बिहार में कुछ ही देर के लिए और ठीक से भी नहीं दिखेगा।

जबकि असम, अरुणाचल, मणिपुर, नागालैंड में ये ग्रहण बिल्कुल नहीं दिखेगा।

नई दिल्ली में यह सूर्य ग्रहण शाम करीब 04:29 पर शुरू होकर सूर्यास्त के साथ 18:09 पर खत्म हो जाएगा।

अमावस पर सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी लगभग एक लाइन में आ जाते हैं। जिसे सूर्य ग्रहण कहते हैं। 25 अक्टूबर को भी सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी लगभग सीधी रेखा में रहेंगे। जिससे चंद्रमा आंशिक रूप से कुछ वक्त के लिए सूर्य को ढंकता हुआ दिखाई देगा, जिससे आंशिक सूर्य ग्रहण होगा। इस ग्रहण के दौरान भारत में सूर्य का 55% हिस्सा चंद्रमा से ढंका होगा।

भारत में दिनभर रहेगा सूतक, नहीं होगी पूजा-पाठ-

वैसे तो सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है, लेकिन धर्म और ज्योतिष के नजरिए से भी यह सूर्य ग्रहण खास रहेगा, क्योंकि इस बार दिवाली के अगले दिन सूर्य ग्रहण पड़ रहा है। भारत में शाम 4 बजे से ग्रहण शुरू होने की वजह से इसका सूतक 12 घंटे पहले, यानी सुबह 4 बजे से ही शुरू हो जाएगा। इसलिए गोवर्धन पूजा 25 की बजाय 26 अक्टूबर को होगी।

सूर्य ग्रहण भारत में आंशिक रूप से दिखेगा, लेकिन इसका असर वातावरण और आम लोगों पर भी पड़ेगा। इसलिए सूतक काल और ग्रहण के समय सावधानियां रखनी होगी। सूतक काल और ग्रहण के दौरान मंदिर और घरों के पूजा स्थल बंद रखें। मूर्तियों को न छूएं। खान-पान से परहेज रखें।

ग्रहण अवधि में मंत्र जाप, ध्यान और भजन कीर्तन करें, दान देना चाहिए। ग्रहण खत्म होने के बाद पूजा स्थल और पूरे घर में गंगाजल छिड़ककर शुद्धि करें। नदियों में स्नान करने की भी परंपरा है।

सूतक काल में न करें शुभ काम-

ग्रहण लगने से पहले के समय को अशुभ माना जाता है और इसे ही सूतक काल कहते हैं। सूतक काल में कोई भी मांगलिक काम नहीं होते। न ही किसी व्यक्ति को इस समय में नए काम शुरू करना चाहिए। सूतक काल में न ही खाना बनाएं और न ही खाना खाएं। बने हुए खाने में कुशा घास या तुलसी के पत्ते डालकर रखें। यही नहीं सूतक काल में दांतों की सफाई, बालों में कंघी नहीं करने और नाखुन काटने की भी मनाही होती है। सूतक काल में मंदिर के कपाट बंद कर देते हैं।

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