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Video देखें: किशोर उपाध्याय ने गढ़वाली में ली शपथ, सरबत करीम अंसारी 3 बार मे भी नहीं ले पाए शपथ, क्या फिर से होगी भारत की प्रभुता की शपथ!

देहरादून। उत्तराखण्ड विधानसभा चुनाव 2022 में चुन के आए विधायकों ने आज विधानसभा भवन में सुबह 11 बजे से शपथ ली। इससे पहले उत्तराखण्ड के राज्यपाल रिटायर्ड जनरल गुरमीत सिंह ने राजभवन में सुबह 10 बजे प्रोटेम स्पीकर बंशी धर भगत को शपथ दिलवाई।

उत्तराखण्ड के कुल 70 में से 69 विधायकों ने आज शपथ ली, जबकि किच्छा से कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ आज शपथ लेने नहीं पंहुंचे। उन्होंने इसके लिए स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया।

वहीं टिहरी सीट से जीत कर आए किशोर उपाध्याय ने गढ़वाली में शपथ ली, लेकिन गढ़वाली को भाषा का दर्जा न होने के कारण उन्हें दोबारा शपथ लेने को कहा गया जिसके बाद किशोर उपाध्याय ने हिंदी में शपथ ली। बता दें कि गढ़वाली को भाषा का दर्जा नहीं है, गढ़वाली मात्र बोली के रूप में ही भारतीय संविधान में दर्ज है।

किशोर उपाध्याय ने ली गढ़वाली में शपथ-

आपको बता दें कि किशोर उपाध्याय ने शपथ लेने से पहले प्रोटेम स्पीकर से कहा कि मैं गढ़वाली में शपथ लूंगा, जिसके लिए प्रोटेम स्पीकर बंशीधर भगत ने मना नहीं किया, आप वीडियो में सुन सकते हैं। लेकिन विधानसभा के अधिकारी ने शपथ लेने के बाद इसपर प्रोटेम स्पीकर से कुछ कहा, जिसके बाद किशोर उपाध्याय को दोबारा शपथ लेने को कहा गया।

जबकि मंगलोर से विधायक सरबत करीम अंसारी ने हिंदी में पहली बार मे गलत शपथ ली, जिसके बाद उन्हें दोबारा शपथ लेने को कहा गया तो शरबत करीम अंसारी ने दोबारा भी गलत शपथ ली, फिर प्रोटेम स्पीकर बंशीधर भगत ने उन्हें पढ़ कर (3-4 3-4) शब्द शपथ दिलवाई, जिसे सही शपथ मान लिया गया, जबकि जुसमे भी उन्होंने “भारत की प्रभुता और … अक्षुण” का उच्चारण सही नहीं किया।

सरबत करीम अंसारी ने नहीं ली भारत की प्रभुता की शपथ-

सरबत करीम अंसारी की शपथ की सही तो मान लिया गया, लेकिन क्या “भारत की प्रभुता और … अक्षुण” को “भारत की परतुभा (और बोला ही नहीं)… सम्पूर्ण रखूंगा” यह सही शपथ है!

बात शपथ मात्र की नहीं भारत की प्रभुता और अखंडता अक्षुण रखने की भी है। जब भारत की प्रभुता को परतुभा और अक्षुण को सम्पूर्ण बोला जाए तो सवाल उठना लाजमी है।

क्या ऐसे विधायक जो पहले भी चुन कर आ चुके हैं, उन्हें बोल कर भी शपथ लेने में दिक्कत है, या फिर इसके पीछे उनकी कोई खुरापात है, जो भी हो उनकी शपथ तो फिर से यानी चौबारा होनी चाहिए। आखिर बात भारत की प्रभुता की है।

आपको बता दें कि उत्तराखण्ड के 5 विधायकों ने संस्कृत में भी शपथ ली है।

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