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‘फ्लाइंग सिख’ मिल्खा सिंह का कोरोना से निधन, पांच दिन पहले भारतीय महिला वॉलीबॉल टीम की कप्तान पत्नी निर्मल मिल्खा सिंह का हुआ था निधन

‘फ्लाइंग सिख’ नाम से मशहूर भारत का विश्व भर में परचम लहराने वाले महान धावक मिल्खा सिंह का कोरोना से लम्बी लड़ाई के बाद निधन हो गया। उन्होंने 91 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। पांच दिन पहले भारतीय महिला वॉलीबॉल टीम की कप्तान एवं महान धावक मिल्खा सिंह की पत्नी निर्मल मिल्खा सिंह का भी कोरोना से निधन हो गया था। वो 85 साल की थीं। बेटे जीव मिल्खा सिंह मशहूर गोल्फर हैं।

पत्नी का वियोग नहीं सह पाए फ्लाइंग सिख-

5 दिन पूर्व 13 जून को मिल्खा सिंह की पत्नी के निधन पर उनके परिवार के प्रवक्ता की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि ‘‘हमें आपको यह सूचित करते हुए अत्यंत दुख हो रहा है कि श्रीमती निर्मल मिल्खा सिंह का कोविड-19 के खिलाफ बहादुरी से लड़ने के बाद आज शाम चार बजे निधन हो गया।” ‘‘वह मिल्खा परिवार की रीढ़ की हड्डी की तरह थी। वह 85 वर्ष की थीं। यह दुखद है कि फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह दाह संस्कार में शामिल नहीं हो सके क्योंकि वे अभी भी आईसीयू (चंडीगढ़ में पीजीआईएमईआर) में हैं।’

कामनवेल्थ गेम में जीता था भारत का पहला गोल्ड-

मिल्खा सिंह कामनवेल्थ गेम्स में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाले वे पहले भारतीय थे। उनका जन्म 20 नवम्बर 1929 को हुआ था।

40 साल तक रहा उनका नेशनल रिकॉर्ड-

‘फ्लाइंग सिख’ ने रोम के 1960 ग्रीष्म ओलंपिक और टोक्यो के 1964 ग्रीष्म ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया था। इसके साथ ही उन्होंने 1958 और 1962 के एशियाई खेलो में भी स्वर्ण पदक जीता था। 1960 के रोम ओलंपिक खेलों में उन्होंने पूर्व ओलंपिक कीर्तिमान तोड़ा, लेकिन पदक से वंचित रह गए। इस दौरान उन्होंने ऐसा नेशनल कीर्तिमान बनाया, जो लगभग 40 साल बाद जाकर टूटा। 

मिल्खा सिंह ने भारत के लिए कई पदक जीते हैं, अपने करियर के दौरान उन्होंने करीब 77 रेस जीती। लेकिन रोम ओलंपिक में उनके पदक से चूकने की कहानी लोगों को आज भी याद है। वह 1960 ओलंपिक में 400 मीटर की रेस में चौथे नंबर पर रहे। उन्हें 45.73 सेकंड का वक्त लगा, जो 40 साल तक नेशनल रिकॉर्ड रहा।

मिल्खा सिंह को बेहतर प्रदर्शन के लिए 1959 में पद्म अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा 2001 में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से भी सम्मानित दिया गया, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया था। मिल्खा कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले एकमात्र खिलाड़ी थे, लेकिन बाद में कृष्णा पूनिया ने 2010 में डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक हासिल किया था। इसके साथ ही उन्होंने 1958 और 1962 एशियन गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीते थे। मिल्खा सिंह ने कई अंतरराष्ट्रीय  टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया। खेलों में उनके अतुल्य योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें भारत के चौथे सर्वोच्च सम्मान पद्मश्री से भी सम्मानित किया था।

एशियाई खेलों में चार स्वर्ण पदक और कॉमनवेल्थ गेम्स में एक गोल्ड मेडल जीतनेवाले मिल्खा सिंह की रफ्तार की दीवानी दुनिया थी। फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर इस धावक को दुनिया के हर कोने से प्यार और समर्थन मिला। मिल्खा का जन्म अविभाजित भारत (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ, लेकिन वह आजादी के बाद हिंदुस्तान आ गए। मिल्खा की प्रतिभा और रफ्तार का यह जलवा था कि उन्हें पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान ने उन्हें ‘फ्लाइंग सिख’ की उपाधि से नवाजा। इसके बाद से मिल्खा सिंह को पूरी दुनिया में ‘फ्लाइंग सिख’ के नाम से जाना जाने लगा।

आपको बता दें कि आज की तारीख में भारत के पास बैडमिंटन से लेकर शूटिंग तक में वर्ल्ड चैंपियन है। बावजूद इसके ‘फ्लाइंग सिख’ मिल्खा सिंह की ख्वाहिश अधूरी रह गई। उनका कहना था कि वे दुनिया छोड़ने से पहले भारत को एथलेटिक्स में ओलंपिक मेडल जीतते देखना चाहते थे।

भारतीय महिला वॉलीबॉल टीम की कप्तान एवं महान धावक मिल्खा सिंह की पत्नी निर्मल मिल्खा सिंह का पांच दिन पहले ही 13 जून को मोहाली के एक अस्पताल में COVID-19 संक्रमण से संबंधित जटिलताओं के कारण निधन हो गया था। निर्मल मिल्खा सिंह पिछले महीने इस बीमारी की चपेट में आयी थीं। वह 85 वर्ष की थीं।

मिल्खा सिंह के परिवार में एक बेटा और तीन बेटियां हैं। मिल्खा सिंह को कोविड-निमोनिया के कारण मोहली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसी अस्पताल में दो दिन बाद 26 मई को पत्नी निर्मल मिल्खा सिंह को भी भर्ती कराया गया था। जहाँ 13 जून को पत्नी का निधन हो गया था। जबकि मिल्खा सिंह को तबियत बिगड़ने पर इससे पहले पीजीआईएमईआर की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती कराया गया।

उनके बेटे एवं अनुभवी गोल्फर जीव मिल्खा सिंह और अमेरिका में चिकित्सक उनकी बेटी मोना मिल्खा सिंह अपनी माँ के अंतिम संस्कार के दौरान उपस्थित थे। माता-पिता के बीमार होने के बाद जीव और मोना दोनों क्रमश: दुबई और अमेरिका से चंडीगढ़ आए हुए हैं।

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