the95news

the95news

the95news

कुंभ कोरोना फर्जी टेस्ट में FIR, हरिद्वार जिलाधिकारी ने दिए आदेश

देहरादून। हरिद्वार कुंभ मेले के दौरान कथिततौर पर एक लाख फर्जी कोरोना टेस्टिंग के मामले में प्रदेश सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। विरोधी दलों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच को लेकर सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस ने उच्च न्यायालय के सिटिंग जज की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाने की मांग की है। उधर, आम आदमी पार्टी ने भी प्रकरण की जांच के लिए हाईपावर कमेटी बनाने ऑडिट करने का मुद्दा उठाया है।

विरोधियों की मांग के जवाब में शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल का कहना है कि मामला संज्ञान में आते ही सरकार ने हरिद्वार के जिलाधिकारी को जांच सौंपी है। जिलाधिकारी ने इस मामले में फर्म के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज करा दी है। अब इस मामले की जांच स्वाभाविक रूप से पुलिस करेगी। जांच में यदि अन्य फर्मों से जुड़े तथ्य सामने आएंगे तो उनके खिलाफ भी जांच हो सकती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कोरोना जांच एजेंसी की तरफ से सबमिट किए गए दस्तावेजों में फर्म का अड्रेस अंसल चैंबर, भीकाजी कामा प्लेस, ‘ईस्ट दिल्ली’ दर्ज है। जबकि पूर्वी दिल्ली में भीकाजी कामा प्लेस है ही नहीं। कंपनी की वेबसाइट पर अड्रेस नोएडा सेक्टर-63 की एक बिल्डिंग का दर्ज है। पते पर पहुंचने पर वहां केवल एक टिन शेड पड़ी दिखी। जितने फोन नंबर दिए गए थे, वे सभी सेवा में नहीं थे। कंपनी के एक डायरेक्टर से इस बारे में बात की गई। उन्होंने गलत अड्रेस को मानवीय गलती करार दिया। वहीं गलत फोन नंबर की वजह फर्म का पुराना लेटरहेड सबमिट किया जाना बताया। उन्होंने यह भी कहा कि नोएडा में जहां अभी टिन शेड है, वहां पर कभी फैक्ट्री हुआ करती थी। उन्होंने बताया, ‘हमने दुकान दो साल पहले ही बंद कर दी लेकिन वेबसाइट पर अभी भी पुराना अड्रेस ही शो कर रहा है।’ यह भी बताया कि कंपनी अभी दक्षिणी दिल्ली के अंसल चैंबर से काम कर रही है। लॉकडाउन के दौरान एक कूरियर कंपनी को रजिस्टर्ड ऑफिस लीज़ पर दे दी गई थी। उन्होंने टेस्ट घोटाले पर कहा, ‘हम राज्य की जांच एजेंसी के साथ सहयोग करेंगे। सैंपल कलेक्शन और डेटा का काम दो प्राइवेट लैब्स ने किया था, जिनके साथ हमारी MoU थी। हम केवल मध्यस्थ की भूमिका में थे।’

हरिद्वार में महाकुंभ के दौरान एंटीजन जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। उसके बाद सरकार हरकत में आई और इस मामले में हरिद्वार के जिलाधिकारी को जांच करने को कहा। हरिद्वार जिला प्रशासन ने इस मामले की जांच के लिए सीडीओ के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है।

कमेटी इस समय इस मामले की जांच कर रही है। इस बीच स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि लैब ने जांच रिपोर्ट में भारी फर्जीवाड़ा किया। लैब द्वारा की गई कुल एक लाख जांचों में से 10 हजार की रिपोर्ट पॉजिटिव दिखाई गई है। जबकि 90 हजार की रिपोर्ट नेगेटिव दी गई है। हैरानी की बात यह है कि 90 हजार नेगेटिव रिपोर्ट्स में से 40% के करीब फर्जी हैं।

रिपोर्टों को फर्जी माने जाने के पीछे वजह यह है कि आईसीएमआर के पोर्टल पर जब रियल टाइम डेटा चेक किया गया तो पता चला कि ये रिपोर्ट राजस्थान से एक बंद कमरे और कुछ सीमित मोबाइल नम्बरों से भरी गई हैं।

कोरोना टेस्ट जांच घोटाले में FIR-

हरिद्वार कुंभ मेले के दौरान कोरोना जांच घोटाले के मामले में हरिद्वार के जिलाधिकारी सी रविशंकर ने एक लैब पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए हैं।

मुकदमा चेन्नई की एचएलएल लैब के खिलाफ दर्ज होगा, जिसने आगे दो अन्य लैबों को जांच कराने का काम सौंपा हुआ था। इस कंपनी ने कनखल, हरिद्वार शहर, देहरादून, रानीपुर और श्यामपुर क्षेत्र में कोरोना जांच की थी।  

अब इस मामले में जिलाधिकारी सी रविशंकर ने बुधवार रात को सीएमओ हरिद्वार डॉ. एसके झा को आरोपी लैब संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश जारी कर दिए हैं। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग आरोपी लैब के खिलाफ सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने जा रहा है। यह मुकदमा बुधवार रात को ही दर्ज करा दिया जाता, लेकिन सरकारी अधिवक्ता के शहर में न होने के कारण अब यह मुकदमा गुरुवार को दर्ज कराया जाएगा।

कुंभ स्वास्थ्य विभाग ने 9 निजी लैब को कुंभ मेले में आने वाले लोगों की कोरोना जांच करने का जिम्मा सौंपा था। आरोपी लैब की जांच के लिए जिलाधिकारी ने जांच कमेटी भी गठित की हुई है। अभी 9 लैबों की जांच रिपोर्ट आनी बाकी है। 

यह भी पढ़ें-

धर्म और संस्कृति