मुनी की रेती व ढ़ालवाला के शराब ठेके होंगे बंद, कुम्भ की आस्था से कोई समझौता नहीं, देवस्थानम बोर्ड पर पुनर्विचार होगा-मुख्यमंत्री तीरथ

o *कुम्भ की आस्था से कोई समझौता नहीं, मुनी की रेती व ढ़ालवाला के शराब ठेके होंगे बंद-मुख्यमंत्री तीरथ*
o *देवस्थानम बोर्ड पर पुनर्विचार किया जाएगा।*
o *अगले महाकुंभ के लिए संतों को अभी से भूमि चिन्हित कर दी जाएगी।*

हिंदुओं की तीर्थ नगरी ऋषिकेश में भारत के इतिहास में पहली बार खुले शराब के ठेके पर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने बड़ा बयान दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने तीर्थ नगरी ऋषिकेश में शराब के ठेके खोल डाले थे। यह ठेके भारत के इतिहास में पहले बार तीर्थ नगरी ऋषिकेश में खुले थे। लेकिन अब मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने यह फैसला पलट दिया है। बता दें कि हिंदुओं की तीर्थ नगरी ऋषिकेश में शराब के ठेके खोलने का जनता ने काफी विरोध किया था।

वहीं उत्तराखण्ड के चारधाम – बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री सहित 51 मंदिरों को देवस्थानम बोर्ड में भी पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शामिल किया था इसपर भी मुख्यमंत्री तीरथ रावत ने पुनर्विचार की बात कही है। इसका पुरोहितों-पुजारियों ने जमकर विरोध किया था।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने सप्तसरोवर, हरिद्वार में विश्व हिंदू परिषद के केन्द्रीय मार्गदर्शक मंडल उपवेशन में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ की आस्था से कोई समझौता नहीं किया जायेगा। कुंभ क्षेत्र में शराब की दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी।  संतों की मांग पर उन्होंने कहा कि मुनी की रेती व ढ़ालवाला के शराब के ठेके बंद किये जायेंगे।

मुख्यमंत्री तीरथ ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड में शामिल किए गए 51 मंदिरों पर पुनर्विचार किया जायेगा। जल्द ही तीर्थ पुरोहितों की बैठक बुलाई जायेगी। सबके हक-हकूकों का पूरा ध्यान रखा जायेगा। उन्होंने कहा कि चार धामों के बारे में शंकराचार्यों द्वारा प्राचीन काल से जो व्यवस्था की गई है उसका पूरी तरह पालन किया जाएगा, उसमें कोई छेड़छाड़ नहीं होगी।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि हरिद्वार में होने वाले अगले कुंभ के लिए 2010 एवं 2021 कुंभ के अनुसार चिन्हित भूमि के अनुरूप अखाड़ों, शंकराचार्यों, महामंडलेश्वर और संत समाज के लिए अभी से भूमि चिन्हित की जाएगी। इसके लिए डिजिटल प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि शपथ लेने के बाद मैंने सबसे पहले हरिद्वार कुंभ की बैठक ली। शिवरात्रि के स्नान पर्व पर हरिद्वार कुंभ में संतो का आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला।

धर्म और संस्कृति