हिन्दू धर्म के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है।

देवी मां सरस्वती को विद्या और ज्ञान की देवी का दर्जा दिया जाता है।

बसंत पंचमी के दिन ही मां सरस्वती का प्राकट्य दिवस मनाया जाता है।

मां सरस्वती की पूजा करने से भक्तों को देवी मां की कृपा से बुद्धि और विद्या का प्राप्त होती है।

बसंत पंचमी का पर्व बसंत मौसम की शुरुआत का सूचक है, पूरे दिन अबूझ मुहूर्त रहेगा। अर्थात बसंत पंचमी का दिन बेहद शुभ होता है और इस दिन किसी भी नए कार्य की शुरुआत की जा सकती है।

ज्योतिष के अनुसार बसन्त पंचमी के दिन लोग बगैर पंचांग देखे दिन भर में कभी भी अपने कार्य को पूरा कर सकते हैं। लोग इस दिन परिवार में छोटे बच्चों को पहली बार किताब और कलम पकड़ाने का भी विधान है।

बसन्त पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र धारण किया जाता है। इस दिन पीला रंग का कुछ मीठा पकवान बनाया जाता है। पीले मीठे चावल खाने को इस दिन उपयुक्त माना जाता है। इसके अलावा, इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा करने का भी विधान है।

पूजा का मुहूर्त-

मंगलवार, 16 फरवरी 2021

पंचमी तिथि आरंभ – सुबह 3 बजकर 36 मिनट से

पंचमी तिथि समाप्त- फरवरी 17, 2021 को सुबह 5 बजकर 46 मिनट पर

पूजा का शुभ मुहूर्त- सुबह 06 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक

देवी सरस्वती के मंत्र: 
श्लोक-

ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।
कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।
वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।
रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।
सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च

वंदना-
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥२॥

आप सभी को बसन्त पंचमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

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