VIDEO देखें- कार्यकर्ताओं के सवालों से तिलमिलाए कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह बोले ‘काम किया होता तो 11 पर न आते’

चमोली। 18 नवम्बर 2020, कर्णप्रयाग में कांग्रेस की अंतर्कलह एक बार फिर से सामने आ गई, इस बार कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने ही पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया

चमोली जिले के कर्णप्रयाग में बुधवार को कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में जब प्रीतम सिंह ने कहा कि चमोली जिले की थराली विधानसभा सीट पर उप चुनाव कांग्रेस जनसभा के कारण हारी। (असल मे थराली उपचुनाव में हरीश रावत ने जनसभा की थी) इसके बाद कार्यकताओं ने अपने ही प्रदेश अध्यक्ष पर सवाल दाग दिए।

जानकारी के अनुसार बीरेंद्र मिंगवाल और संजय रावत के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने अध्यक्ष प्रीतम सिंह से कहा कि अगर जनसभाओं से चुनाव हारते हैं तो यह फार्मूला हर जगह लागू कर दीजिए, साथ ही कहा कि जनसभा से चुनाव हारते हैं तो जनसभा का कॉन्सेप्ट समाप्त कर दीजिए।

जिसपर तिलमिलाए उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बैठ गए और बोले आप ही बोल लीजिए। प्रीतम सिंह यहीं नहीं रुके और बोले कि काम 2002 से 2007 तक कि हमारी तिवारी सरकार में हुए थे और हमने मंत्री रहते हुए तब अपनी विधानसभा चकराता में सभी कार्य करवाए थे। दुर्भाग्य से तिवारी सरकार दोबारा नहीं आई। 2007 तक हमारी सरकार थी।

बता दें कि हरीश रावत सरकार में भी प्रीतम सिंह राज्य के गृहमंत्री थे। लेकिन उन्होंने वीडियो में तिवारी सरकार को हमारी सरकार कहा है। मतलब साफ है कि वो हरीश रावत व विजय बहुगुणा के नेतृत्व वाली 2012 से 2017 तक कि कांग्रेस सरकार पर निशाना साध रहे थे।

प्रीतम सिंह यहीं नहीं रुके उन्होंने बिना हरीश रावत का नाम लिए कहा कि काम किया होता तो 11 पर न आते। आपको बता दें कि 2017 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी उत्तराखण्ड में मात्र 11 सीट पर सिमट गई थी।

लेकिन प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह भूल गए कि उनकी अगवाई में 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उत्तराखण्ड की 70 में से मात्र 5 विधानसभा सीटों पर ही आगे रह पाई। यहीं नहीं प्रीतम सिंह को टिहरी लोकसभा सीट पर अब तक कि सबसे बड़ी ऐतिहासिक हार का भी सामना करना पड़ा था।

इसी को कहा जाता है कि सूत न कपास आपस मे लठ्मलट्ठा अर्थात अगर कांग्रेस की गुटबाजी इसी तरह से जारी रही तो कांग्रेस के नेता कांग्रेस की मजबूती के लिए नहीं बल्कि प्रथमदृष्टया बीजेपी को दोबारा उत्तराखण्ड की सत्ता दिलवाने के लिए काम करते हुए नजर आते हैं।

शायद कांग्रेस के नेताओं ने बचपन मे 1 लकड़ी और और लकड़ियों के गट्ठर को तोड़ने वाली कहानी नहीं सुनी। सुनी होती तो अपने नेताओं की जड़ों में मट्ठा डालने की जगह उत्तराखण्ड की जनता के लिए सड़कों पर आंदोलन करते हुए नजर आते।

टूट-फुट और गुटबाजी के चलते ही कांग्रेस 2017 उत्तराखण्ड विधानसभा चुनाव हारी लेकिन कांग्रेस के नेता इससे सबक लेते नजर नहीं आते। कांग्रेस नेताओं की गुटबाजी आए दिन किसी न किसी रूप में दिखाई देती ही रहती है।

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