शारदीय नवरात्र की बधाई, 9 दुर्गे के 9 नाम, प्रत्येक दिन मां के इस रूप को पूजें-

शारदीय नवरात्रि शुरू हो गए हैं। नवरात्रि के दौरान पूरे 9 दिनों में माँ दुर्गा  के नौ रूपों की पूजा होगी।

नवरात्रि के पहले दिन माँ शैल पुत्री की पूजा की जाती है। चैत्र नवरात्र (मई या अप्रैल के दौरान) से हिन्‍दू वर्ष की शुरुआत होती है, जबकि शारदीय नवरात्र (दिवाली से पहले आने वाले नवरात्रि) के पश्चात दशहरा पूजन होता है। शारदीय नवरात्रि के आखिरी दिन के बाद 10वें दिन विजयदशमी मनाई जाती है। इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था। फिर दीवाली के दिन प्रभु राम 14 वर्ष का वनवास काट कर अयोध्या वापस आये थे।

1. शैलपुत्री-
माँ दुर्गा का प्रथम रूप है शैलपुत्री। शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की बेटी हैं। इन्हें करुणा और ममता की देवी माना जाता है। मान्‍यता है कि जो भी भक्‍त श्रद्धा भाव से मां की पूजा करता है उसे सुख और सिद्धि की प्राप्‍ति होती है।

2. ब्रह्मचारिणी-
माँ दुर्गा का दूसरा रूप है ब्रह्मचारिणी। इनकी पूजा करने से यश, सिद्धि और सर्वत्र विजय की प्राप्ति होती है। इन्होंने भगवान शंकर को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसलिए इन्हें तपश्चारिणी के नाम से भी जाना जाता है।

3. चंद्रघंटा-
माँ दुर्गा का तीसरा रूप है चंद्रघंटा। शेर पर सवार माँ चंद्रघंटा की पूजा करने से भक्तों के कष्ट हमेशा के लिए खत्म हो जाते हैं। इन्हें पूजने से मन को शक्ति और वीरता मिलती है।

4. कूष्माण्डा-
माँ दुर्गा का चौथा रूप है कूष्माण्डा। माँ कूष्माण्डा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक मिट जाते हैं। इनकी पूजा से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है।

5. स्कंदमाता-
माँ दुर्गा का पांचवा रूप है स्कंदमाता। माँ स्कंदमाता भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं। इन्हें मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता के रूप में भी पूजा जाता है।

6. कात्यायनी-
माँ दुर्गा का छठा रूप है कात्यायनी। माँ कात्यायनी को गौरी, उमा, हेमावती और इस्वरी नाम से भी जाना जाता है। यह महर्षि कात्यायन को पुत्री के रूप में मिलीं इसीलिए इनका नाम कात्यायनी पड़ा। जिन लड़कियों की शादी में देरी हो रही होती है, वह मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए कात्यायिनी माता की ही पूजा करती हैं।

7. कालरात्रि-
माँ दुर्गा का सातवां रूप है कालरात्रि। कालरात्रि की पूजा करने से काल और असुरों का नाश होता है। इसी वजह से माँ के इस रूप को कालरात्रि कहा जाता है। यह माता हमेशा शुभ फल ही देती हैं इसीलिए इन्हें शुभंकारी भी कहा जाता है।

8. महागौरी-
माँ दुर्गा का आठवां रूप है महागौरी। यह भगवान शिवजी की अर्धांगिनी या पत्नी हैं। इस दिन मां को चुनरी भेट करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

9. सिद्धिदात्री-
नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा का नौवां रूप है सिद्धिदात्री। सिद्धिदात्री की पूजा करने से रूके हुए हर काम पूरे होते हैं और हर काम में सिद्धि मिलती है।

दशहरा-
नवरात्रि के बाद दसवें दिन दशहरा पूजन होता है। इस दिन प्रभु राम ने रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्त की थी। इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।

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