कर्क संक्रांति :उत्तराखण्ड में सावन आज से, जानिए क्या है सूर्य का राशि परिवर्तन अर्थात संक्रांत

सूर्य के एक राशि से दूसरे राशि में गोचर करने (जाने) को संक्रांति कहते हैं। सूर्य हर 30 दिन में एक राशि से दूसरी राशि में जाते हैं। संक्रांति एक सौर घटना है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार पूरे वर्ष में प्रायः कुल 12 संक्रान्तियाँ होती हैं और प्रत्येक संक्रांति का अपना अलग महत्व होता है। शास्त्रों में संक्रांति की तिथि एवं समय को बहुत महत्व दिया गया है।

उत्तराखण्ड में कर्क संक्रांति से ही सावन की शुरुआत मानी जाती है। नेपाल व पंजाब में भी सक्रांति से सावन का महीना माना जाता है। जबकि भारत के अन्य हिस्सों में सावन की शुरुवात पुर्णिमा से मानी जाती है।

जाने संक्रांति क्या है-
सूर्य हर महीने अपना स्थान बदल कर एक राशि से दूसरे राशि में चला जाता है। सूर्य के हर महीने राशि परिवर्तन करने की प्रक्रिया को संक्रांति के नाम से जाना जाता है। हिन्दू धर्म में संक्रांति का समय बहुत पुण्यकारी माना गया है। संक्रांति के दिन पितृ तर्पण, दान, धर्म और स्नान आदि का काफ़ी महत्व है। इस वैदिक उत्सव को भारत के कई इलाकों में बहुत ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।

भारत के कुछ राज्यों जैसे उत्तराखण्ड, आन्ध्र प्रदेश, उड़ीसा, कर्नाटक, केरल, गुजरात, तेलांगना, तमिलनाडु, पंजाब और महाराष्ट्र में संक्रांति के दिन को साल के आरम्भ के तौर पर माना जाता है। जबकि बंगाल और असम जैसे कुछ जगहों पर संक्रांति के दिन को साल की समाप्ति की तरह माना जाता है।

महत्वपूर्ण संक्रातियाँ-

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 12 राशियाँ होती हैं, जिन्हें मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर,कुम्भ और मीन के नाम से जाना जाता है। जैसा कि हमने आपको बताया विभिन्न राशियों में सूर्य के प्रवेश को ही संक्रांति की संज्ञा दी गई है। सूर्य बारी-बारी से इन 12 राशियों से हो कर गुजरता है। वैसे तो सूर्य का इन सभी राशियों से होकर गुजरना शुभ माना जाता है लेकिन हिन्दू धर्म में कुछ राशियों में सूर्य के इस संक्रमण को बेहद खास मानते हैं। आइये जानते हैं कुछ महत्वपूर्ण संक्रांतियों के बारे में–

मकर संक्रांति–
संक्रांति करते समय जब सूर्य देवता मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो इस दिन को मकर सक्रांति कहा जाता है। मकर संक्रांति भारत में मनाया जाने वाला एक प्रमुख और लोकप्रिय पर्व है। इस त्यौहार को हर साल जनवरी के महीने में मनाया जाता है। कहीं-कहीं पर मकर संक्रांति को उत्तरायण भी कहते हैं, उत्तरायण मतलब जिस दिन सूर्य उत्तर की ओर से यात्रा शुरू करता है। मकर संक्रांति 14 जनवरी या कभी-कभी, 15 जनवरी को मनाते हैं।

मेष संक्रांति–
पारंपरिक हिंदू सौर कैलेंडर में इसे नए साल की शुरुआत के तौर पर माना जाता है। इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है। यह आम तौर पर 14 या 15 अप्रैल को मनाई जाती है। इस दिन को भारत के कई राज्यों में त्योहार के रूप में मनाते हैं। जैसे पंजाब में बैसाखी, ओडिशा में पाना संक्रांति और एक दिन बाद मेष संक्रांति, बंगाल में पोहेला बोइशाख आदि जैसे प्रचलित नामों से।

मिथुन संक्रांति–
भारत के पूर्वी और पूर्वोत्तर प्रांतों में मिथुन संक्रांति को माता पृथ्वी के वार्षिक मासिक धर्म चरण के रूप में मनाया जाता है, जिसे राजा पारबा या अंबुबाची मेला के नाम से जानते हैं।

धनु संक्रांति–
इस संक्रांति को हेमंत ऋतु शुरू होने पर मनाया जाता है। दक्षिणी भूटान और नेपाल में इस दिन जंगली आलू जिसे तारुल के नाम से जाना जाता है, उसे खाने का रिवाज है। जिस दिन से ऋतु की शुरुआत होती है उसकी पहली तारीख को लोग इस संक्रांति को बड़े ही धूम-धाम से मनाते हैं।

कर्क संक्रांति–
प्रायः 16 जुलाई के आस-पास सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश करने पर कर्क संक्रांति मनाई जाती है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इसे छह महीने के उत्तरायण काल का अंत माना जाता है। साथ ही इस दिन से दक्षिणायन की शुरुआत होती है, जो मकर संक्रांति में समाप्त होता है।

बृहस्पतिवार 16 जुलाई को सूर्य मिथुन राशि से कर्क राशि में गोचर करने (जाने) पर “कर्क सक्रांति” शुरू हो गई।

सूर्य के इस राशि परिवर्तन से सभी राशियों के जातकों के जीवन में कुछ बदलाव होने की संभावना होती है।

ग्रहों की चाल हमारे जीवन को काफ़ी हद तक प्रभावित करती है।

सूर्य ग्रह का गोचर-
16 जुलाई 2020 सुबह 10:32 बजे कर्क राशि में होगा और 16 अगस्त 2020 शाम 18:56 बजे तक सूर्य इसी राशि में रहेगा।

राशि चक्र की पांचवी राशि सिंह के स्वामी सूर्य को ऊर्जा और आत्मा का कारक माना गया है। सूर्य को ज्योतिष में पिता का कारक भी माना जाता है। इसलिये सूर्य का अच्छा होना जातक के आत्मबल में भी वृद्धि करता है, और कुंडली में सूर्य का अच्छी अवस्था में ना होना कई तरह की परेशानियों की वजह भी बनता है।

जब भी सूर्य किसी एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में परिवर्तन करता है तो इसे संक्रांति कहा जाता है।

अब जब सूर्य कर्क राशि में गोचर कर रहा है तो इसे कर्क संक्रांति भी कहा जा सकता है।

संक्रांति का यह समय स्नान-दान पुण्य आदि के लिये बहुत ही शुभ माना जाता है।

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