चन्द्र ग्रहण: गुरु पूर्णिमा रविवार को साल का तीसरा चन्द्र ग्रहण, क्या करें क्या न करें, उपाय

05 जुलाई रविवार को गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है। इससे 15 दिन पहले 21 जून 2020 को सूर्य ग्रहण लगा था। आइए जानते हैं, ग्रहण, सूतक, उपाय व अन्य।

चंद्र ग्रहण 2020 एक ऐसी प्रमुख खगोलीय घटनाएं हैं जिसका ज्योतिष में भी बड़ा महत्व है। चंद्र ग्रहण का ज्योतिष के अनुसार राशियों पर भी बहुत गहरा असर पड़ता है।

बता दें कि इस साल चार बार चंद्र ग्रहण की घटना है जिसमें से 2 ग्रहण बीत चुके हैं और यह तीसरा चंद्र ग्रहण है।

साल का पहला चंद्र ग्रहण 10-11 जनवरी को लगा था, दूसरा चंद्र ग्रहण पिछले महीने 5-6 जून को लगा था। जबकि साल 2020 का अंतिम चंद्र ग्रहण 30 नवम्बर को लगना है।

5 जुलाई को साल का तीसरा चंद्र ग्रहण-
5 जुलाई को उपच्छाया चंद्र ग्रहण 08:38 बजे से 11:21 तक लगेगा।

चंद्र ग्रहण 2020 की यह घटनाएं किन नक्षत्रों में और कौन सी तिथियों को होंगी इनसे किन राशियों में पर प्रभाव पड़ेगा

साल का तीसरा चंद्र ग्रहण 05 जुलाई-
चंद्र ग्रहण 2020 का तीसरा चंद्र ग्रहण 5 जुलाई, रविवार को होगा। यह ग्रहण 08:38 से 11:21 तक लगेगा।

हिंदू पंचांग के अनुसार यह ग्रहण धनु राशि में पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के दौरान, शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होगा।

जिससे धनु राशि के जातकों के जीवन में इस अवधि में कुछ बदलाव आ सकते हैं।

चंद्र ग्रह के ज्योतिष में प्रभाव-
खगोल विज्ञान के अनुसार चंद्रमा ग्रह नहीं है लेकिन, वैदिक ज्योतिष में इसे ग्रह का दर्जा दिया गया है और नवग्रहों में यह एक महत्वपूर्ण ग्रह है। चंद्रमा कर्क राशि का स्वामी है और वृषभ राशि में यह उच्च का तथा वृश्चिक राशि में नीच का होता है। जन्म कुंडली में यह माता का कारक ग्रह माना गया है, क्योंकि इसका स्वभाव में ग्रहणशील है और निशाचर है। पारिवारिक खुशहाली, तेज दिमाग और अच्छे व्यक्तित्व के लिये कुंडली में चंद्रमा का मजबूत होना बहुत आवश्यक है। वहीं अगर कुंडली में चंद्रमा कमजोर है तो इसकी वजह से शारीरिक विकास में कमी आती है और ऐसे इंसान का मन चंचल रहता है। जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर है उन्हें मोती रत्न धारण करना चाहिए। यदि आप अपने चंद्रमा को मजबूत कर लें तो आपको लाभकारी परिणामों की प्राप्ति होती है।

ज्योतिष के अनुसार चंद्र ग्रहण तब होता है जब राहु और केतु चंद्रमा के साथ किसी राशि या घर में एक साथ आ जाते हैं। राहु और केतु चंद्रमा के ही दो काल्पनिक बिंदू उत्तरी नोड और दक्षिणी नोड हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन में निकले अमृत को जब मोहिनी रुप धारण कर भगवान विष्णु सब देवताओं में बांट रहे थे तो स्वरभानु नाम का एक असुर देवताओं का रुप धारण कर देवताओं के बीच आ गया लेकिन सूर्य और चंद्रमा को स्वरभानु के बारे में पता लग गया और उन्होंन यह बात भगवान विष्णु को बता दी। इसके बाद भगवान विष्णु ने अपने चक्र से स्वर भानु के धड़ को सिर से अलग कर दिया। हालांकि स्वरभानु मरा नहीं क्योंकि तब तक अमृत की कुछ बूंदें उसके गले में जा चुकी थीं। तब से स्वर भानु के सिर वाले भाग को राहु और धड़ को केतु के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि, सूर्य और चंद्र देव ने राहु-केतु यानि स्वरभानु का भेद भगवान विष्णु को बताया था इसलिये शत्रुतावश राहु-केतु सूर्य और चंद्रमा से बदला लेने के इन दोनों को ग्रहण लगाकर शापित करते हैं।

चंद्र ग्रहण के दौरान सावधानियां-

  • ग्रहण के दौरान कोई भी नया काम शुरु न करें।
  • चंद्र ग्रहण के शुरु होने से पहले खाने की सामग्री में तुलसी के पत्ते डालें। और तुलसी के पेड़ को ग्रहण के दौरान न छुएं।

*चंद्र ग्रहण के दौरान आपको धार्मिक और प्रेरणादायक पुस्तकों को पढ़ना चाहिए, इनको पढ़ने से आपके अंदर से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाएगी।

*साथ ही मंत्रों के जाप करने से भी ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सकता है।

*ग्रहण के दौरान खाना न बनाएं और खाना खाने से भी बचें। खाना बनाना और खाना दोनों को ही ग्रहण के दौरान शुभ नहीं माना जाता है।

*ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को तेज धारदार औजारों जैसे चाकू, कैंची और छुरी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, इससे शीशु के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।

*इस समय देवी देवताओं की मूर्ति और तस्वीरों को भी नहीं छूना चाहिए।

*ग्रहण के दौरान दांतून करने, बालों पर कंघी लगाने और मलमूत्र का त्याग करने से भी बचना चाहिए।

*ग्रहण की समाप्ति के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए।

*ग्रहण समाप्ति के बाद यदि आप जरुरतमंदों को जरुरी चीजें दान करते हैं तो इससे आपको अच्छे फलों की प्राप्ति होती है।

*ग्रहण के दौरान : “ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृत तत्वाय धीमहि तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात्” मंत्र का जाप करें।

*चंद्र देव की पूजा करें और ध्यान लगाने की कोशिश करें।

चंद्र ग्रहण सूतक काल (अशुभ अवधि)-
चंद्र ग्रहण के शुरु होने से पूर्व अशुभ काल शुरु हो जाता है, इस अशुभ काल को सूतक काल कहा गया है। इस समयावधि में किसी भी शुभ कार्य को करने से बचना चाहिए।

चंद्र ग्रहण के शुरु होने से 3 पहर पहले यानि 9 घंटे पहले यह अवधि शुरु होती है। आपको बता दें कि एक पहर 3 घंटे का होता है। इस दौरान कुछ सावधानियां बरतना जरुरी होता है, हालांकि छोटे बच्चों, अस्वस्थ लोगों और बुजुर्गों के लिये यह सावधानियां बरतना जरुरी नहीं है।

चंद्र ग्रहण देखना सुरक्षित-
सूर्य ग्रहण से विपरीत, चंद्र ग्रहण को नग्न आंखों से देखा जा सकता है। इससे आंखों पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है।

चंद्र ग्रहण को देखने के लिये आंखों पर कोई सुरक्षा जैसे चश्मा पहनने की भी आवश्यकता नहीं होती।

सावधान-
गर्भवती महिलाओं को सलाह दी जाती है कि चंद्र ग्रहण के दौरान वो घर से बाहर न निकलें। इससे उनके गर्भ में पल रहे बच्चे पर गलत असर पड़ सकता है। इससे आपके बच्चे का विकास रुक सकता है।

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