रुद्रप्रयाग में पूर्व प्रधान तो हरिद्वार में कंट्रोल रूम को बंधक बनाने की सूचना के बाद आत्महत्या, लॉकडाउन से आत्महत्या में वृद्धि!

देहरादून। कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए लगाए गए लॉक डाउन के दुष्परिणाम अब सामने आने लगे हैं। उत्तराखण्ड के विभिन्न जिलों में लगातार आत्महत्या के मामले सामने आ रहे हैं।

लॉक डाउन के बाद से लोग मानसिक तनाव में हैं। ऐसे में लोगों में सब सही हो जाएगा यह उम्मीद जगाना बहुत जरूरी हो गया है।

ताजा मामला रुद्रप्रयाग जिला मुख्यालय से 6 किमी दूरी पर स्थित तल्ला नागपुर पट्टी के ग्राम दरम्वाडी के पूर्व ग्राम प्रधान महेश (पप्पू) दरमोडा का है। पूर्व ग्राम प्रधान महेश (पप्पू) दरमोडा ने रविवार को जहर खाकर आत्महत्या कर ली। रविवार शाम 6 बजे इस युवा प्रधान ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर दी है।

मिलनसार स्वभाव व हर किसी के काम में सक्रिय रहने वाले इस युवा ने ऐसा क्यों किया अभी पता नहीं चल पाया है। आज पुलिस और पटवारी दरम्वाडी गांव में पहुंच कर जांच करेंगे व परिजनों का बयान दर्ज करेंगे।

कल शाम को जैसे ही गांव में यह खबर मिली तो कुछ ग्रामीण तुरंत उनके घर पहुंचे और गाड़ी से रूद्रप्रयाग जिला मुख्य चिकित्सालय ले गये। परंतु तब तक जहर अपना काम कर चुका था। हास्पिटल में उन्होंने दम तोड दिया।

हरि टीशर्ट में पूर्व ग्राम प्रधान

ग्रामीण आंचल का एक लगभग 40 बर्षीय सरल और हर किसी की मदद के लिए आगे रहने वाले इस युवा ने ऐसा क्यों किया अभी जांच बाकी है। विगत 5 बर्ष वह ग्राम प्रधान रहा। हाल ही में कुछ महा पूर्व उसका विवाह भी हुआ था।

वहीं शनिवार रात को हरिद्वार में एक व्यक्ति ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी कि उसे बंधक बना लिया गया है। कंट्रोल रूम से सूचना थाने में पहुंची। लेकिन पुलिस ने लापरवाही बरती और अगली सुबह रामचरण पुत्र नौरंगी लाल निवासी हापुड़ उत्तर प्रदेश की लाश सिडकुल स्थित सीसीआई ट्रांसपोर्ट कम्पनी के दफ्तर में पंखे से लटकी मिली।

SSP हरिद्वार ने इस मामले में सिडकुल थाना प्रभारी प्रशांत बहुगुणा को लाइन हाजिर कर दिया व रात्रि अधिकारी मोहन कठैत के साथ ही कॉन्स्टेबल दीपक दानु व भरत सिंह को सस्पेंड कर दिया है।

वाहन चालक रामचरण वेतन लेने सिडकुल आया था और वाहन को हापुड़ में ही छोड़ आया था, जबकि वाहन साथ लाने के लिए कहा गया था। वाहन चालक रामचरण को जबरन कार्यालय में ही रोक लिया गया था और उसे कार्यालय में ही बन्द कर सब चले गए थे। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है व परिजनों को सूचना दे दी गई है।

हर अंधेरे के बाद उजाला, और रात के बाद सवेरा जरूर होता है। उम्मीद न हारें अवश्य ही सब ठीक होगा। कोरोना काल एक युद्ध की भांति है, इससे विजय के लिए लड़ना जरूरी है। हम उत्तराखण्डी देश व समाज के लिए लड़ कर सेना में शहीद होने वाले हैं। उम्मीद न छोड़ें लड़ेंगे जीतेंगे…. संजय भट्ट, एडिटर the95news

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