पंचायत जनाधिकात ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत से मिलकर पंचायत राज संसोधन अधिनियम में सुधार की कि मांग

The95news, देहरादून। पंचायत जनाधिकार मंच उत्तराखण्ड के बैनर तले जोत सिंह बिष्ट, मथुरा दत्त जोशी, अश्विन बहुगुणा, जगमोहन रौथाण व महेश ढूँढ़ियाल ने मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड त्रिवेन्द्र रावत को ज्ञापन देकर पंचायत राज संशोधन अधिनियम की गलतियों में सुधार के साथ दो से अधिक संतान वालों पर पंचायतों में चुनाव लड़ने पर लगाई गई रोक में सुधार करने व शैक्षिक योग्यता में ओबीसी की स्थिति को स्पष्ट करने का आग्रह किया गया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने पंचायत जनाधिकार मंच बात को सुनने के बाद विचार करने की बात कही है।

पंचायत जनाधिकार मंच उत्तराखण्ड
दिनांक 08 जुलाई 2019

सेवा में 
श्रीमान मुख्यमंत्री महोदय 
उत्तराखण्ड सरकार, 
देहरादून

आदरणीय महोदय,
उत्तराखंड सरकार ने माह जून 2019 में आहुत विधानसभा सत्र में उत्तराखण्ड पंचायती राज अधिनियम 2016 की विभिन्न धाराओं में संशोधन करते हुए बिना चर्चा के सदन से पारित कर दिया गया है। इस सम्बन्ध में आपके संज्ञान में लाना चाहते है कि पारित संशोधन विधेयक में मूल अधिनियम की धारा 8 में संशोधन करते हुए धारा 8 की उपधारा 1 खण्ड (त) के पश्चात खण्ड (थ), (द), (ध), (न) एवं (प) नये खण्ड सम्मिलित किये गये हैं। नए सम्मलित खण्ड (थ) में शैक्षिक योग्यता का निर्धारण करते हुए पंचायत चुनाव लड़ने वालों को कक्षा 10 पास या समकक्ष तथा आरक्षित वर्ग को छूट देते हुए अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए कक्षा 8 पास होना अनिवार्य कर दिया गया है. इसमें पंचायतों में 1410 पदों पर चुनाव लड़ने वाले अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए शैक्षिक योग्यता के संबंध में कोई उल्लेख न होना विधेयक की खामी को उजागर करता है तथा यह एक अपूर्ण विधेयक है। इसके अलावा खण्ड (द) के अनुसार 2 से अधिक संतान वाला कोई भी व्यक्ति पंचायत चुनाव लड़ने योग्य नहीं होगा। यह भी व्यवहारिक नहीं है क्योंकि कोई भी कानून बनने की तिथि के बाद लागू होता है लेकिन इस संषोधन विधेयक के अनुसार जिस किसी के भी दो से अधिक संतान है चाहे उस संतान का जन्म 40 वर्श पूर्व ही क्यों न हो गया हो वह पंचायत चुनाव लड़ने के योग्य नहीं होगा।महोदय, पंचायतों में राज्य में 62112 पदों पर प्रतिनिधि चुने जाने हैं, इसमें प्रत्येक पद के लिए औसतन 3 लोग चुनाव मैदान में होंगे। इस हिसाब से प्रत्येक ग्राम पंचायत में सामान्य वर्ग के 8 से अधिक लोग कक्षा 10 पास तथा 20 से अधिक लोग आरक्षित वर्ग के कक्षा 8 पास उपलब्ध होने चाहिए। यदि सरकार ने यह सुनिश्चित कर लिया है तो हमें इस पर कोई आपत्ति नहीं है, अन्यथा ग्राम पंचायत सदस्यों के पद पर निर्वाचन के लिए यदि पर्याप्त संख्या में इतनी शैक्षिक योग्यता के लोग उपलब्ध नहीं होंगे तो ऐसी दशा में ग्राम पंचायते गठित नहीं हो सकेंगी।

अतः हमारा आपसे विनम्र आग्रह है कि दो से अधिक संतान वाले संशोधन में पुर्नविचार करते हुए कानून लागू होने के 300 दिन बाद तीसरी संतान पैदा करने वाले दम्पत्ति को चुनाव से वंचित करने का नियम पारित होना चाहिए तथा न्यूनतम शैक्षिक योग्यता धारण करने के लिए 2 वर्ष का समय दिया चाहिए ताकि पंचायत चुनाव लड़ने के इच्छुक लोग निर्धारित शैक्षिक योग्यता प्राप्त करने के लिए प्रयास कर सके। ऐसे व्यावहारिक संशोधन पर पुर्नविचार करने की कृपा करेंगे।

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