इन्वेस्टर समिट 0/0 जनता के टेक्स के 25 करोड़ स्वाहा

The95news, देहरादून। देहरादून के क्रिकेट स्टेडियम रायपुर में चल रहे उत्तराखण्ड इन्वेस्टमेंट समिट में प्रधानमंत्री मोदी तो आये परन्तु मुकेश अम्बानी ने अपना प्रतिनिधि तक नहीं भेजा। एक वीडियो के जरिये रिलाएंस चीफ मुकेश अम्बानी ने अपना संदेश जरूर सुनाया। यही नहीं इन्वेस्टर समिट में किसी भी औद्योगिक समूह ने इन्वेस्टमेंट की घोषणा नहीं की। जिससे राज्य सरकार द्वारा इस से के लिए लगाए गए 25 करोड़ रुपए स्वाहा हो गए।

आचार्य बालकिशन ने खोली त्रिवेन्द्र सरकार की पोल खोल कर रख दी। 70 हज़ार करोड़ के इन्वेस्टमेंट के mou करने का दावा फुस्स साबित हुआ। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि 18 सालों में राज्य में 37 हज़ार करोड़ का इन्वेस्टमेंट हो चुका है। समिट में आमंत्रित लोगों में जो समूह आये उन सभी ने यहाँ 2003 से लेकर 2007 के बीच निवेश किया था। सभी ने उत्तराखंड को इन्वेस्टमेंट के लिये अच्छा डेस्टिनेशन बताया है।

अमूल देगा आँचल दूध को ट्रेनिंग…

अमूल ने भी नहीं की किसी प्रकार के निवेश की घोषणा जबकि मुख्यमंत्री ने कहा था कि अमूल करेगा राज्य में निवेश, इसके विपरीत अमूल आँचल डेरी के कर्मचारियों को केवल प्रशिक्षण देंगे। ITC, महिंद्रा, JSW, आदि ने भी कोई घोषणा नहीं की। अब सवाल ये है कि ये 70,000 करोड़ के निवेश MoU का आधार क्या है? जबकि पिछले 18 वर्षों में केवल 37 हज़ार का ही इन्वेस्टमेंट हुआ हो। ये 37 हज़ार का इन्वेस्टमेंट भी तब आया जब राज्य ने हरिद्वार, रुद्रपुर, सेलाकुई में औद्योगिक आस्थान विकसित किये और कई निजी आस्थानों को को भी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए प्रोत्साहित किया।

राज्य के पास नहीं इन्वेस्टरों को देने के लिए जमीन…

आज राज्य के पास देने के लिए ज़मीन भी नहीं है। ये बात महिंद्रा एंड महिंद्रा के सीईओ ने अपने आज के भाषण में कही की हमनें 2003 में गलती की कि उस समय लैंड होने के बावजूद हमनें विस्तार के लिए लैंड नहीं ली।

वहीं मंत्री मदन कौशिक का कहना है कि महिंद्रा समूह उत्तराखण्ड में इलेक्टॉनिक कार बनाने का प्रोजेक्ट लगाएगा।

पीएम से न कुछ मांगा, न कुछ दिया…

इस आयोजन से लगता है कि आज मुख्यमंत्री भी राजनीतिक रूप से विफल ही साबित हुए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इन्वेस्टर समिट में आने के राज्य हित में लाभ नहीं उठाया। उन्होंने एक अच्छा मौका गवां दिया। न तो उन्होंने पीएम से कुछ मांगा और न ही पीएम ने कुछ देने की बात कही। समिट के उदघाटन से पूर्व या बाद में पीएम की राज्य के आला अधिकारियों से कोई मीटिंग सम्पन्न नहीं हो पाई। केंद्र सरकार स्तर पर लटके कई मामले आज हल किये जा सकते थे, लेकिन लीडरशिप इसके लिए तैयार नहीं थी। यदि आज इन्वेस्टरों को लुभाने के लिए कोई आर्थिक पैकेज की घोषणा होती तो शायद इस समिट का आयोजन सार्थक होता और राज्य के लोगों के द्वारा दिये गए टैक्स में से खर्च किया गया 25 करोड़ रुपए का कोई लाभ दिखाई देता।

दूसरी ओर समापन पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने त्रिवेंद्र रावत की पीठ थपथपाते हुवे कहा कि ये एक ऐतिहासिक आयोजन था। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इन्वेस्टर्स समिट के दूसरे दिन समारोह के समापन मे शिरकत करते हुए कहा कि उत्तराखंड के आर्थिक विकास का जब भी इतिहास लिखा जाएगा, उसमें इन्वेस्टर्स समिट का जिक्र जरूर होगा। उन्होंने कहा कि पहली बार इन्वेस्टमेंट को लेकर इतना बड़ा आयोजन हुआ है। इसके लिए उत्तराखंड सरकार बधाई की पात्र है। इन्वेस्टर्स समिट का समापन सत्र शुरू हो गया है। जिसमें गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी शिरकत कर रहे हैं।

राजनाथ सिंह ने की उत्तराखंडियों की तारीफ…


ग्रह मंत्री ने अपने संबोधन में उत्तराखंड सरकार की तारीफ की। कानून व्यवस्था का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि कानून व्यवस्था और सुरक्षा के रूप में उत्तराखंड आदर्श राज्य है। निवेश के लिए इससे बेहतर कोर्इ दूसरी स्थिति नहीं है। साथ ही गृहमंत्री ने कहा कि मैनें किसी संत से पूछा कि उत्तराखंड को देवभूमि क्यों कहते हैं? तो उन्होंने कहा कि यहां के धार्मिक क्षेत्रों में एक अलग प्रकार की स्प्रीचुअल वाइब्रेशन है, इस कारण उसे देवभूमि कहा जाता है। लेकिन मेरा मानना है कि उत्तराखंड के रहने वाले लोग भी बहुत अच्छे हैं, यहां के लोग बड़े मन के होते हैं। देश के लिए शहीद होने वाले लोग उत्तराखंड में ही मिलेंगे। इसलिए इसे देवभूमि कहा जाता है।
4-5 साल में आएंगे परिणाम सीएम त्रिवेंद्र…

सीएम त्रिवेंद्र रावत ने इन्वेस्टर्स समिट में प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने प्रत्येक स्टाल का निरीक्षण कर उत्पादों के बारे में जानकारी ली और सीएम ने हॉर्टिकल्चर से सम्बंधित उत्पादों के बारे भी जानकारी ली। सीएम ने कहा कि समिट को लेकर निवेशकों के साथ ही सरकार में भी खास उत्साह है। ये पहल राज्य के लिए वरदान साबित होगा। सीएम ने ये भी कहा कि यह दीर्घकालीन प्रोजेक्ट है और इसे आकार लेने में वक्त लगेगा। आने वाले चार से पांच सालों में अच्छे परिणाम सामने आएंगे।

 

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