The95news, विशेष संवादाता। बात उस समय की है जब उत्तराखण्ड राज्य अस्तित्व में नही आया था, देहरादून स्कूली शिक्षा, लीची, चुने के पत्थर, बासमती चावल, बेकरी के रस आदि के लिए प्रसिद्ध था। जो भी देहरादून आता था देहरादून का दीवाना हो जाता था। देहरादून जिला स्वयं देहरादून, मसूरी, ऋषिकेश, चकराता, सहस्त्रधारा, घुच्चू पानी, लच्छीवाला, जैसी सूंदर जगहों से सुसज्जित चहकता रहता था।
परन्तु पृथक राज्य आंदोलन के बाद राजग सरकार द्वारा गैरसैण को साइड कर देहरादून को उत्तराखण्ड राज्य की अस्थाई राजधानी बना दिया। बस वो दिन था और आज का दिन है मानो वो देहरादून कहीं खो से गया है।
लोकसभा चुनाव 2014 में मोदी जी की 5 साल में 2019तक 100 स्मार्ट सिटी बनाने की योजना में देहरादून ने भी हिचकोले खाते हुवे तीसरी-चौथी लिस्ट में 76 वें नम्बर पर बमुश्लिक स्थान प्राप्त किया तो दून वासियीं की बाछें खिल गयी, मानो देहरादून फिर से स्वर्ग बनने को है। अब जब केंद्र की सरकार को मात्र 1 वर्ष बाकी है और स्मार्ट सिटी कागजों पर गोते खा रही है तो स्मार्ट सिटी में मामले को जनता की अदालत में ले जाना ही उचित प्रतीत होता है।
तो कहना ही पड़ेगा स्मार्ट सिटी नम्बर 76 हाजिर हो
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क्या कहती है स्मार्ट सिटी की विकिपीडिया:-
भारत में स्मार्ट नगर-
भारत में स्मार्ट नगर की कल्पना प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की है जिन्होंने देश के १०० नगरों को स्मार्ट नगरों के रूप में विकसित करने का संकल्प किया है। सरकार ने २७ अगस्त २०१५ को ९८ प्रस्तावित स्मार्ट नगरों की सूची जारी कर दी।
योजना:-
सरकार की योजना के अनुसार २० नगर वर्ष २०१५ में ,४० नगर २०१६ में और ४० नगर २०१७ में स्मार्ट नगरों के रूप में विकसित करने की योजना प्रस्तावित है।दिनांक २८ जनवरी २०१६ को भारत सरकार ने 20 स्मार्ट सिटी घोषित किये
वित्त:-
केंद्रीय बजट में वर्ष २०१४ में ७,०६० करोड़ रुपये का प्रस्ताव। केंद्र सरकार की इस योजना में ५ वर्ष में कुल ४८,००० करोड़ का निवेश करने की योजना है और इतना ही धन सम्बंधित राज्य सरकारें अपने -अपने राज्य में चयनित नगरों के विकास में खर्च करेंगी। अर्थात केंद्र और राज्य सरकारें इस योजना में सामान धन निवेश करेंगी। इस वर्ष २०१५ में चयनित स्मार्ट नगरों के विकास के लिए २०० करोड़ रुपये और अगले चार वर्षों तक प्रत्येक वर्ष १०० करोड़ रुपये प्रत्येक नगर को आवंटित होंगे।
स्मार्ट सिटी के बुनियादी सिद्धांत:-
क्वालिटी ऑफ लाइफ
किफायती घर हर तरह का इन्फ्रास्ट्रक्चर पानी और बिजली चौबीसों घंटे शिक्षा के विकल्प सुरक्षा मनोरंजन और स्पोर्ट्स के साधन आसपास के इलाकों से अच्छी और तेज कनेक्टिविटी अच्छे स्कूल और अस्पताल
निवेश ( इन्वेस्टमेंट)
मानव संसाधन और प्राकृतिक संसाधन के मुताबिक पूरा निवेशबड़ी कंपनियों को वहां अपनी उद्योग लगाने के लिए सुविधाएं और सहूलियत मिले।टैक्स का ज्यादा बोझ न हो
रोजगार
स्मार्ट नगर में इन्वेस्टमेंट ऐसा आए जिससे वहां या आसपास रहने वाले लोगों को रोजगार के पूरे मौके।स्मार्ट नगर के अंदर रहने वालों को अपनी आमदनी के लिए उस इलाके से ज्यादा दूर नहीं जाना पड़े।
स्मार्ट नगर के मानक:-
ट्रान्सपोर्ट
स्मार्ट सिटी के अंदर एक स्थान से दूसरे स्थान जाने का ट्रैवल टाइम 45 मिनट से ज्यादा न हो।कम से कम 2 मीटर चौड़े फुटपाथ।रिहाइशी इलाकों से 800 मीटर की दूरी या 10 मिनट वॉक पर बस या मेट्रो की सुविधा।
आवास
95 फीसदी आवासीय इलाके ऐसे हों जहां 400 मीटर से भी कम दूरी पर स्कूल, पार्क और मनोरंजन पार्क मौजूद हों।20 फीसदी मकान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए हों।कम से कम 30 फीसदी आवासीय और व्यवसायिक क्षेत्र बस या मेट्रो स्टेशन से 800 मीटर की दूरी के दायरे में ही हों।
बिजली और पानी
स्मार्ट सिटी में 24×7 पानी और बिजली सप्लाई हो।100 फीसदी घरों में बिजली कनेक्शन हों। सारे कनेक्शनों में मीटर लगा हो।लागत में नुकसान न हो। यानी कोई बिजली-पानी चोरी न कर पाए।प्रति व्यक्ति कम से कम 135 लीटर पानी दिया जाए।
शिक्षा
15 फीसदी इलाका एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स के लिए हो।हर 2500 लाेगों पर एक प्री-प्राइमरी, हर 5000 लोगों पर एक प्राइमरी, हर 7500 लोगों पर एक सीनियर सेकंडरी और हर एक लाख की आबादी पर पहली से 12वीं क्लास तक का एक इंटिग्रेटेड स्कूल हो।सवा लाख की आबादी पर एक कॉलेज हो।10 लाख की आबादी पर एक यूनिवर्सिटी, एक इंजीनियरिंग कॉलेज, एक मेडिकल कॉलेज, एक प्रोफेशनल कॉलेज और एक पैरामेडिकल कॉलेज हाे।
स्वास्थ्य
स्मार्ट सिटी में इमरजेंसी रिस्पॉन्स टाइम 30 मिनट से ज्यादा न हो।हर 15 हजार लोगों पर एक डिस्पेंसरी हो।एक लाख की आबादी पर 30 बिस्तरों वाला छोटा अस्पताल, 80 बिस्तरों वाला मीडियम अस्पताल और 200 बिस्तरों वाला बड़ा अस्पताल हो।हर 50 हजार लोगों पर एक डायग्नोस्टिक सेंटर हो
वाईफाई कनेक्टिविटी
100 फीसदी घरों तक वाईफाई कनेक्टिविटी हो।100 एमबीपीसी की स्पीड पर वाईफाई पर मिले।
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*स्मार्ट सिटी पहली लिस्ट -*
केंद्र सरकार ने पहली 20 शहरों की लिस्ट जारी कर दी है लेकिन इस सूची से बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल पूर्णतः गायब नजर आ रहे हैं…
प्रधानमंत्री की स्मार्ट सिटी योजना के तहत केंद्र सरकार ने पहली 20 शहरों की लिस्ट जारी कर दी है। जिन्हें स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जाना है। लेकिन इस सूची से बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल पूर्णतः गायब नजर आ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार इस सूची से बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल की तरह ही उत्तर प्रदेश के भी किसी शहर को इस सूची में जगह नहीं दी गई है। जबकि मध्यप्रदेश के तीन शहर इंदौर, भोपाल और जबलपुर को इस सूची में शामिल कर लिया गया है।
शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने सूची जारी करते हुए बताया कि अगले दो चरणों में 40-40 शहरों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जायेगा। इन शहरों में अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जायेंगी।
चयनित 20 शहरों की सूची
1.  भुवनेश्वर
2.  पुणे
3.  जयपुर
4.  सूरत
5.  कोच्चि
6.  इंदौर
7.  जबलपुर
8.  भोपाल
9.  सोलापुर
10.  दावणगेरे
11.  अहमदाबाद
12.  नयी दिल्ली
13.  कोयंबटूर
14.  काकीनाड़ा
15.  बेलगामग
16.  उदयपुर
17.  गुवाहाटी
18.  चेन्नई
19.  लुधियाना
20.  विशाखापट्नम
स्मार्ट सिटी की दूसरी लिस्‍ट में 13 शहर शामिल, लखनऊ टॉप पर और फरीदाबाद सबसे नीचे
यूनियन मिनिस्टर वेंकैया नायडू ने मंगलवार को फ़ास्ट ट्रैक स्मार्ट सिटी के विजेता शहरों की घोषणा की. इसमें 13 शहरों का चयन किया गया जिसमे लखनऊ को पहला स्थान मिला है.
*स्मार्ट सिटी की दूसरी लिस्ट*:-
केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने मंगलवार को फ़ास्ट ट्रैक स्मार्ट सिटी की दूसरी लिस्‍ट जारी कर दी हैै. इस दूसरी लिस्‍ट में 13 शहरों को चुना गया है, जिसमें लखनऊ को पहला स्थान मिला है.
लखनऊ
वारंगल,
धर्मशाला,
चंडीगढ़,
रायपुर,
कोलकाता,
भागलपुर,
पणजी,
पोर्ट ब्लेयर,
इम्फाल,
रांची,
अगरतला
फरीदाबाद
का भी चयन हुआ है. इनका विकास स्मार्ट सिटी के तौर पर किया जाएगा.
गौरतलब है कि पहले टॉप 100 शहरों की लिस्ट में लखनऊ अपनी जगह बनाने में नाकामयाब रहा था. इसके बाद फ़ास्ट ट्रैक स्मार्ट सिटी कम्पटीशन के जरिए 13 शहरों का चयन किया गया. इनमें लखनऊ को पहला स्थान मिला है.
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के 100 शहरों को स्मार्ट सिटी के तौर पर डेवलप करने की योजना बनाई है. इन शहरों को आधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस किया जाएगा, जहां विश्वस्तरीय व्यवस्था होगी.
तीसरी लिस्ट में इन शहरों को मिली जगह
तिरुवनंतपुरम
नया रायपुर
राजकोट
अमरावती
पटना
करीमनगर
मुजफ्फरपुर
पुडुचेरी
गांधीनगर
श्रीनगर
सागर
करनाल
सतना
बेंगलुरू
शिमला
देहरादून
तिरुपुर
पिंपरी
चिंचवाड़
बिलासपुर
पासीघाट
जम्मू
दाहो
तिरुनेलवेली
थुटुकुड़ी
त्रिचिरापल्ली
झांसी
ऐजवल
इलाहाबाद
अलीगढ़
गंगटोक
ये शहर बनेंगे स्मार्ट सिटी
चौथी लिस्ट में उत्तर प्रदेश के सबसे ज्यादा तीन शहरों बरेली, मुरादाबाद और सहारनपुर को जगह मिली हैं। इसके अलावा तमिलनाडु में इरोड, दादर नगर हवेली में सिलवासा, लक्षद्वीप में कवारती, अरुणाचल प्रदेश में ईटानगर और दमन दीव में दीव और बिहार के बिहारशरीफ को जगह मिली है। पुरी ने कहा कि एक जगह विधानसभा चुनाव होने के कराण आखिरी शहर का नाम घोषित नहीं किया गया है। प्रदेश में आचार सहिंता खत्म होते ही इस नाम की घोषणा भी कर दी जाएगी।
अंतिम जानकारी के अनुसार 99 शहर स्मार्ट सिटी बनने ले लिए लिस्ट में शामिल किए जा चुके हैं।
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स्मार्ट सिटी देहरादून में गंदगी से होने वाला स्वाइन फ्लू और बीजेपी विधायक की मौत, बचाव
थराली से बीजेपी विधायक मगन लाल शाह की स्वाइन फ्लू से मौत होने के लगभग एक हफ्ते बाद पता चलता है कि विधायक मगन लाल शाह स्वाइन फ्लू से स्वर्गवासी हुवे हैं। चमोली के एक शिक्षक, देहरादून के मियावाला के एक 36 वर्षीय युवक और देहरादून की ही लक्खीबाग की एक 35 वर्षीय महिला की भी स्वाइन फ्लू से मौत हो चुकी है। स्वास्थ महकमा उत्तराखण्ड के विधायक को सही इलाज नही दे पाया है। जनता का हाल तो जनता ही जानती है।
चमोली के थराली विधायक मगन लाल शाह के बाद स्वाइन फ्लू ने एक युवा शिक्षक और रिसर्च स्कॉलर रोशन नैनवाल की भी जान ले ली। शिक्षक की स्वाइन फ्लू से मौत का पांच दिन बाद तब पता चला, जब बरेली स्थित राममूर्ति स्मारक मेडिकल कॉलेज से रिपोर्ट आई। शिक्षक की मौत के बाद स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
दून के मियांवाला के रहने वाले 36 वर्षीय व्यक्ति की स्वाइन फ्लू से मौत हो गई। दो माह के भीतर प्रदेश में स्वाइन फ्लू से यह चौथी मौत है। इससे पहले थराली विधायक मगनलाल शाह व लक्खीबाग की एक महिला की स्वाइन फ्लू से मौत हुई थी। मियांवाला में बीमारी और न फैले, इसके लिए ग्रामीणों को प्रतिरोधक दवाइयां दी जा रही हैं।
एसीएमओ डॉ. दयाल शरण ने बताया कि मियांवाला निवासी व्यक्ति की कुछ दिन पहले तबीयत खराब हो गई थी। परिजनों से उन्हें एक अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने उनका उपचार शुरू किया, लेकिन उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई।
इसके बाद परिजनों ने उन्हें श्री महंत इंद्रेश अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। जहां उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने बताया कि अस्पताल की लैब ने मरीज को स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि की है। इसके अलावा जांच के लिए सैंपल दिल्ली भी भेजा गया है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. वाइएस थपलियाल के अनुसार सभी सरकारी व निजी अस्पतालों को स्वाइन फ्लू को लेकर खास एहतियात बरतने के निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्हें सख्त हिदायत दी गई है कि कोई भी संभावित मरीज आने पर इसकी सूचना तुरंत विभाग को दें।
स्वाइन फ्लू के कारण
इंफ्लूएंजा-ए वायरस के एक प्रकार एच1 एन1 से स्वाइन फ्लू उत्पन्न होता है। यह वायरस साधारण फ्लू के वायरस की तरह ही फैलता है। स्वाइन फ्लू का वायरस बेहद संक्रामक है और एक इंसान से दूसरे इंसान तक फैलता है। जब कोई खांसता या छींकता है तो छोटी बूंदों में से निकले वायरस कठोर सतह पर आ जाते हैं। यह वायरस 24 घंटे तक जीवित रह सकता है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण
सर्दी, जुकाम, सूखी खांसी, थकान होना, सिरदर्द और आंखों से पानी आना है। इसके अलावा स्वाइन फ्लू में सांस भी फूलने लगती है। अगर संक्रमण गंभीर है तो बुखार तेज होता जाता है।
बरतें सावधानियां
– गंभीर बीमारियों से ग्रसित, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले, सर्दी-जुकाम से पीडि़त, बच्चे और बुजुर्गों को विशेष तौर से सावधानी बरतनी चाहिए।
– इस बीमारी से बचने के लिए स्वच्छता का खासतौर पर ध्यान रखना चाहिए। खांसते और छींंकते समय टिशू से कवर रखें।
– बाहर से आकर हाथों को साबुन से अच्छे से धोएं और सेनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
– जिन लोगों में स्वाइन फ्लू के लक्षण हों, उन्हें मास्क पहनना चाहिए और घर में ही रहना चाहिए।
– स्वाइन फ्लू के लक्षण वाले मरीज से संपर्क व हाथ मिलाने से बचें। नियमित अंतराल पर हाथ धोते रहें।
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बीच निहाल सिंह, मेहर चौहान ने उठाया झाड़ू:
देहरादून की सड़कों पर गंदगी का आलम, बदबू और कूड़े के ढेर पर शहर को देख कर कुछ लोगों से रह नही गया और उन्होंने स्वयं कूड़ा निपटा कर सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने की कोशिस की। परन्तु देहरादून में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल और जगह जगह कूड़े के अम्बार ने देहरादून की ढ़लती खूबसूरती को ग्रहण ही लगा दिया।
सफाई कर्मचारियों की मांग खुद को पक्का करने और सुविधा देने की है। दूसरी तरफ शहर वासियों की मांग शहर में बढ़ती गन्दगी की सफाई की है। ठेकेदारी प्रथा पर 4000 से 6000 रु0 महीना तनख्वाह लेने वाले सफाई कर्मी अपनी हक की मांग कर रहे कि सरकारी नियमो के अनुसार काम से कम रु0 285 रोज तो मिलने चाहिए। और 50 घर पर एक सफाई कर्मचारी होने का नियम भी पालन किया जाना चाहिए। नगर निगम देहरादून की 8 लाख की जनसंख्या पर सिर्फ 750 नियमित सफाई कर्मचारी ओर 600 मोहल्ला स्वच्छ्ता समिति, सविंदा, ठेकेदारी पर रखे कर्मचारी और 120 नाला गैंग के सफाई कर्मचारी कैसे सफाई व्यवस्था दुरुस्त करेंगे।
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देहरादून में सफाई व्यस्ता ठप होने से जनजिवन अव्यस्त है वही सफाई कर्मी हड़ताल पर वही स्वच्छ भारत मोदी भक्त भी गायब है तथा रोज टोपी लगाकर फोटू खिचवाने वाली पार्टी भी नदारत है। इसी बीच पलटन बजार मे व्यापारीयो ने स्वयंमही सफाई की कमान अपने हाथो मे ले ली आर सफाई का संदेश देकर स्वच्छ दून  क्लिन दून बनाने की ठानी है।
मेहर सिहं चौहान
पलटन बजार
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भगत सिंह कालोनी, अधोईवाला का मुख्य मार जो तीन वार्डों 498, 49 ओर 51 न0 वार्डों को जोड़ता है। जहां 4 सरकारी कार्यालय जन जाती निदेशालय, अल्पसंख्यक आयोग, छात्रावास, जल संस्थान भी हैं, पर सबको अपनी तनख्वाह से मतलब है क्षेत्र में गन्दगी हो तो हो। इसके लिए म् निहाल सिंह, गोविंद सिंह, सनी, राहुल आर्य, राहुल थापा, महेंद्र थापा ओर बाबू सिंह ने ही सफाई के लिए झाड़ू उठाई और अपने क्षेत्र में सफाई की कोशिश की।
– निहाल सिंह, भगत सिंह कालोनी
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मौहल्ला स्वच्छता समिति के कर्मचारियों को संविदा पर किये जाने हेतु पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा 22 नवम्बर 2016  को पुरे प्रदेश मे कार्यरत ठेके के कर्मचारियों को संविदा पर किया गया था जिसमे 408 पद नगर निगम देहरादून को मिले थे जिस शासनोदेश को भाजपा सरकार ने रोक रखा है ओर पिछले ढेड साल से सफाई कर्मचारियों को गुमराह किया जा रहा था संविधा पर किये जाने ओर नालागैग के 150 सफाई कर्मचारियों के नाम पर जो मजदूर लिखा है उसे खत्म कर निगम कर्मी बनाया जाये ओर निगम मे रिक्त पदो पर समायोजित किया जाये।
– मोहन कुमार “काला”, पूर्व प्रदेश संयोजक, अनुसूचित जाति विभाग, कांग्रेस
आप देख सकते है ये हाल है वार्ड नंबर 75 लोहियानगर का ओर इस ही वार्ड का नही आज ये हाल पूरे देहरादून का हो रखा है। निरंजनपुर आईटीआई, माजरा, जीएमएस रोड, सभी ओर कूड़ा करकट पड़ा है। कहां है स्वच्छ और सुंदर दून का नारा देने वाले।
– फारूक राव, लोहिया नगर
स्वच्छ भारत अभियान की बात करने वाले और स्वच्छ गंगा की बात करने वाले अब कहां हैं और मोदी जी ने 100 स्मार्ट सिटी बनाने के लिए कहा था। ये सिर्फ़ एक जुमला था जो की स्वच्छ गंगा और क्लीन दून ग्रीन दून की बात करते हैं। अभी भी हमारे शहर के कई ऐसे इलाक़े हैं जो अभी भी कचरा मुक्त नहीं हैं। लोग अभी भी खुले में शौच के लिए जाते हैं, ये भाजपा के लोग बस बड़े बड़े वादे और दावे करते हैं। क्या यही हैं वो क्लीन दून और ग्रीन दून।
जैसे गंगा जी और स्वच्छ भारत के नाम पर पैसा कमाया जा रहा है। देश की जनता को सिर्फ़ और सिर्फ़ गुमराह किया जा रहा है।
जैसे की अब देहरादून शहर के लोगों को अभी इतनी मुसीबतें झेलनी पड़ रही हैं। ऐसी गूँगी बहरी सरकार को डूब मरना चाहिए।
आदर्श सूद, रेस्ट केम्प
शहर सड़ रहा है और हुक्मरान गहरी नींद में सो रहे हैं देहरादून में हर गली मौहल्ले में कुड़े के ढेर लगे हैं । प्रशासन की सेक्टर मजिस्ट्रेटों और पुलिस की मौजूदगी में कूड़ा उठाने की योजना भी औंधे मुंह गिर चुकी है। हालात हाथ से बाहर हो चुके हैं और सरकार अब भी इंतजार के मूड में ही नजर आ रही है। शहर का एेसा कोई गली-कोना या बाजार नहीं है, जहां सड़ता कूड़ा लोगाें की सांसें न अटका रहा हो। महामारी का खतरा सिर पर मंडरा रहा है। जहां नजर डालो, कूड़े के पहाड़ नजर आ रहे हैं।  इस बीच, हड़ताली कर्मचारियों ने मंगलवार को राज्य सरकार का पुतला फूंककर अपना आक्रोश जाहिर किया। इन लोगों ने निगम के स्थायी कर्मचारियों की राह में भी तमाम रोड़े अटका दिए हैं। कूड़े की गाड़ियों को चलने नहीं दिया जा रहा है। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल सरकार के गले की फांस बन गई है। पिछले सप्ताह भर से कूड़ा शहर में जहां-तहां जमा है। इसे कोई उठाने या उठवाने वाला भी नहीं है। कहीं-कहीं पर आम लोगों ने कूड़ा उठवाया भी, लेकिन सिस्टम पूरी तरह से खामोश है। प्रशासन की ओर से बीती रात भी कूड़ा उठान का प्रयास हुआ, लेकिन कहीं भी कूड़ा उठान सफल नहीं हो सका।  शहर के हालात की बात करें, तो तहसील चौक, राजा रोड, सब्जी मंडी आदि स्थानों पर कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। शहर का ऐसा कोई चौराहा नहीं बचा है, जहां कूड़े की भरमार न हो
– सुशील सैनी, उत्तराखण्ड अगेंस्ट करप्शन
स्मार्ट सिटी की घोषणा से क्या होता है, धरातल पर कार्य और पड़ताल से हकीकत बयां हो जाती है। जब नगर निगम देहरादून का मुख्य द्वार (गेट) की दुर्दशा ही नही सुधरी तो कैसी स्मार्ट सिटी। नगर निगम चौराहे पर सड़क टूटी हुई है, नाली सड़क पर ओर सड़क नाली में है। पूरे शहर में ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा रखी है। ऐसी स्मार्ट सिटी से तो हमारा पुराण देहरादून ही अच्छा था।
– निखिल कुमार, पार्षद वार्ड 7, विजय कालोनी
स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 और कूड़े के ढेर पर देहरादून:
नगर निगम देहरादून को 60 सीटों से 100 सीटों तक ले जाने की कवायद जारी है, आपत्तियां, सुनवाई, चुनाव आयोग का हाई कोर्ट नैनीताल जाना और सरकार का निकाय चुनाव को लेकर अटपटा रवैय्या एक तरफ है और नगर निगम की कार्य प्रणाली दूसरी तरफ।
देहरादून में सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाना एक टेढ़ी खीर है। सफाई कर्मियों की कमी से जूझता नगर निगम हॉउस टेक्स और होर्डिंग की कमाई में बढ़ोतरी की आस में ही था कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने घोषणा कर दी की नगर निगम में नए जुड़ रहे क्षेत्रों से 10 वर्षों तक हाउस टेक्स नहीं लिया जायेगा। ऐसे में निगम की आय बडाना और सफाई कर्मियों की भर्ती और सफाई व्यवस्था दूर की कौड़ी नजर आती है।
देहरादून के कनाट प्लेस से नेशविला रोड, करनपुर से सर्वे चौक – रायपुर रोड, एसजीआरआर खुड़बुडा से लेकर कांवली रोड – गांधीग्राम, ट्रांसपोर्ट नगर – माजरा से निरंजनपुर  – लालपुल – पटेल नगर तक गन्दगी के अम्बार और कूड़े के ढेर स्वच्छता अभियान 2018 को चीख चीख कर बुला रहे हैं।
– डॉ आर पी रतूड़ी, प्रदेश प्रवक्ता कांग्रेस
कूड़े का ढेर नही, साहब यह उपलव्धि है:
आज एक बार फिर सुबह सुबह मेरा सामना कूड़े के ढेर से हो गया। सुबह सुबह एक बार फिर वही जान निकाल देने वाली बदबू और चारो तरफ फैले हुए अनेको प्रकार के कूड़े को देख कर एक बार फिर खुद को ही जूता मारने का मन हुआ क्योंकि 10 साल दिए भी तो हमने ही थे। गुस्से में गुजर ही रहा था में वँहा से कि सामने से एक व्यक्ति आता दिखा जिसे पूरा मोहल्ला सबसे समझदार मानता है, वो मुझे देख हँसने लगा , मुझे और गुस्सा आया और मैने उसे फटकार लगा दी। वो हँसते हुए बोला कि शंखधार जी बस यही है आपकी देशभक्ति, कँहा गया आपका राष्ट्रवाद? आप अपने देश और धर्म के लिए थोड़ी सी बदबू बरदाश्त नही कर सकते, थू है आप पर अरे हमारे नेता दिन रात मेहनत कर के सारे देश मे सरकार बना रहे है उनको राम मंदिर बनाना है और आप है कि कूड़े के ढेर के लिए कोस रहे है उनको, शर्म आनी चाहिए आपको। शंखधार जी अगर अपने बच्चो का भविष्य सुरक्षित रखना है और उनको अच्छे दिन देने है देश को विश्व गुरु बनाना है तो भाजपा को लाना है, फिर चाहे हमे वोट डालने के लिए कूड़े का पहाड़ ही क्यों न चढ़ना पड़े। बोलो मेरे साथ भारतमाता की जय वन्देमातरम
फिर बोले अच्छा अब मैं चलता हूँ मुझे मंदिर में सफाई करवानी है राम राम जी।
उन महापुरुष की वाणी सुन अचानक ही मुझे गोवा, बिहार, मेघालय और कर्नाटक याद आ गए फिर यकीन हो गया कि जो पार्टी देश की राजनीति को कूड़ा कर सकती है तो इस ढेर के बारे में क्या सोचना?
यह तो 10 सालो की उपलब्धि है इनकी।
– वैभव शंखधार, खुडबुड़ा मोहल्ला
सालावला मे जसवंत माडर्न स्कूल एवं पुल के पास एवं मध्य सालावला मे व हाथीबड़कला मे कूड़े का अम्बार लगा है कई बार नगर निगम में शिकायत दर्ज करने के बाद भी समस्या का समाधान नही हुआ जिससे कि बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है।
– मनोज बिजल्वाण, सालावाला
रीठा मंडी और यहां बॉम्बे बाग, पथरी बाग क्षेत्र में कूड़े का अम्बार लगा है। चारो तरफ स्कूल हैं बच्चों का बुरा हाल है, बदबू सड़न के कारण बच्चे मुँह ढक कर निकल रहे हैं। कूड़े के कारण जाम की स्थिति भी बनी रहती है। बड़ी परेशानी है।
– शरीफ अहमद, बॉम्बे बाग
डोभलवाला की सड़कों का निर्माण टुकड़ों-टुकड़ों मे हो रहा है। पिछले दो साल से जनता परेशान हो रही है। पानी की लाईन डाले हुये लगभर दो साल हो गये हैं। बरसात के समय यहाँ बहुत भयंकर हाल हो जाता हैं और बहुत दुर्घटना भी होती हैं। यहाँ सड़क का कुछ हिस्सा सीमेन्ट से ठीक किया गया है और कुछ हिस्सा तारकोल और बजरी से ठीक किया गया हैं और कुछ हिस्सा अभी भी ठीक होने का इंतजार कर रहा है। इस तरह टुकड़ों-टुकड़ों मे एक छोटी सी सडक का निर्माण हो रहा है अब इस सडक का निर्माण कब होगा क्षेत्र की जनता आस लगाये बैठी है।
– उदवीर सिह पंवार (चाचा), वार्ड 10 डोभलवाला
स्मार्ट सिटी देहरादून में सड़कों पर बहता नालियों ओर सीवर का पानी:
1 फ़ोटो उत्तरांचल प्रेस क्लब
2 प्रेस क्लब ओर इंडोर स्टेडियम (परेड ग्राउंड) के बाहर सड़क पर बहता नाली का पानी
3 नगर निगम, दून अस्पताल चौक पर नाली में सड़क या सड़क पर नाली
4 क्रोस रॉड पर बहता सीवर का पानी
5 ई सी रोड पर बस स्टॉप का हाल बयां करती नाली
6 गांधी पार्क के गेट पर बहता सिविर का पानी
स्मार्ट सिटी देहरादून में शराब के ठेके के चलते जाम:
आराघर हो या बिंदाल चौक दोनों ही जगह शराब के खरीदारों की बेतरबियत खड़ी गाड़ियां ट्रैफिक जाम का सबब बनती हैं। पर पुलिस प्रशासन के आंख-कान सिर्फ एक ही तरफ देखते -सुनते हैं। उन्हें शायद शराब के खरीदारों से कुछ ज्यादा ही लगाव है। आखिर वेतन तो राजस्व से ही मिलता है और राजस्व शराब से मिलता है। फिर यातायात चरमराता है तो चरमराता रहे।
स्वास्थ:
देहरादून में बीजेपी विधायक मगन लाल शाह की स्वाइन फ्लू से मौत और, देहरादून के मियावाला के 36 वर्षीय युवक तथा लक्खीबाग की 35 वर्षीय महिला की स्वाइन फ्लू से मौत भी स्मार्ट सिटी देहरादून में स्वास्थ की कलई खोलने के लिए काफी है। यहां यह बताना ही जरूरी है कि बीजेपी विधायक की मृत्यु के एक हफ्ते बाद रिपोर्ट आई कि विधायक को स्वाइन फ्लू था। जो कि दुखद व हास्यप्रद है।
देहरादून स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 के होडिंग्स से पटा पड़ा है, जबकि जनता से वसूला गया हाउस टेक्स व अन्य टेक्स जनता के शहर के उच्चीकरण, नालियों की देखरेख, सीवर लाइन के उच्चीकरण और सफाई व्यवस्था में खर्च किया जाना चाहिए। परन्तु देश का दस्तूर सा बन गया है कि टेक्स लिया जाता है विकास और जनता की भलाई के लिए लेकिन टेक्स का उपयोग न हो कर दुरुपयोग नेताओं और अधिकारियों की गाड़ियों, बंगलों, रहन-सहन  और विदेश दौरों के लिए किया जाता है। घोषित स्मार्ट सिटी देहरादून भी कोई अपवाद नही है और यहां भी वही सब जसपाल भट्टी का उल्टा-पुल्टा ही होता है।
आपकी स्मार्ट सिटी का क्या हाल है ये आप जानो, 100 स्मार्ट सिटी शायद कहीं गहरी निंद्रा में सो गई है। आखिर नींद तो सबको आती है।
तो आखिर में कहना ही पड़ेगा – “स्मार्ट सिटी नम्बर 76 हाज़िर हो………..
लेख एवं फोटो – संजय भट्ट

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